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कहीं दब न जाए मेरी आवाज ... खामोशी के बीच

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अहमियत

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अहमियत

वो मुँह घुमा लेते हैं,

जैसे- गाडि़यॉं चौराहे पर ।

गनिमत मानते हैं,

बच के निकलने में ही हैं ।।

***

एक सफर के राही,

सगे बंधु, साथी में,

बंधुत्‍व – भाईचारे की नहीं,

कद की अहमियत ही है ।।

***

छोटे कद वालों से,

कतराते हैं सब ।

शायद कुछ मांग बैठे,

वह तो अर्थाभाव में ही है ।।

***

रिस्‍ते – नाते, दोस्‍ती-यारी,

बड़ी चीज होती है ।

परंतु बराबरी वालों से,

ये तो सबके स्‍वभाव में ही है ।।

***

दिल घबड़ाता है अब,

उन यादों के याद आने से ।

कैसे करे शिकायत,

ये लोग तो अपने ही हैं ।।

***

संघर्ष में अकेले,

सब दुख हैं झेले ।

पर खुशियों में तो,

सब साथ ही हैं ।।

***

दुरसंचार प्रसार से,

दुरियॉं सिमट गई ।

दूर वाले पास और

पास वाले दूर ही हैं ।।

***

संवेदनाएं अंतरजाल (इंटरनेट) पर,

उलझ कर रह गई ।

शायद अहमियत जिंदगी में,

सिर्फ पैसों की ही है ।।

————————————

उदयराज़

लिखा : २५/०८/२०१३



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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

udayraj के द्वारा
September 1, 2013

आज जिंदगी में लोग जिस तरह से सिर्फ पैसों की अहमियत दे रहे हैं उससे हमारे समाज में रिस्ते – नाते , दोस्ती – यारी सब पैसों से ही तौले जा रहे हैं ।

bdsingh के द्वारा
September 2, 2013

विचारणीय बात कही है।बहुत अच्छा।  पैसा के सामने  सभी मान्यतायें फिकी पड़ती दिखायी देती है। “गरीब की वेदना”

udayraj के द्वारा
September 2, 2013

जी महाशय । दीन सबको लखत है, दीनही लखे न कोई … वाली बात है। आपका बहुत बहुत धन्‍यवाद ।

September 2, 2013

संघर्ष में अकेले, सब दुख हैं झेले । पर खुशियों में तो, सब साथ ही हैं ।। bilkul sahi kaha aapne .

September 2, 2013

एक से बढ़कर एक सही सन्देश दिए हैं आपने .

udayraj के द्वारा
September 3, 2013

आपके उत्साहबर्धक प्रक्रिया के लिए आभार । धन्यवाद ।

udayraj के द्वारा
September 3, 2013

यही जीवन का सच है । आपकी प्रक्रिया के लिए धन्यवाद।

संजय त्रिपाठी के द्वारा
September 8, 2013

बहुत  ही सुंदर,दिल को कुछ छू गया!

udayraj के द्वारा
September 9, 2013

अपका बहुत – बहुत धन्‍यवाद ।


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