meri awaaz - meri kavita

कहीं दब न जाए मेरी आवाज ... खामोशी के बीच

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दंगा

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**** दंगा ****

शहर के एक हिस्‍से में,

कुछ लोंगो ने भड़काया दंगा ।

कल तक जो थे भाई समान,

वही बहाने लगे खुन की गंगा ।।

*********************

हो रहा नरसंहार हर ओर,

मानवता न रही तनिक शेष ।

धर्म के नाम पर इन ,

दंगाइयों में भरा क्लेश ।।

*******************

जले, मिटे कितने ही इस,

सम्‍प्रदायिकता की आग में ।

बुझ गए कितने ही कुलदीप,

न रहा सिंदुर कितनों की मांग में ।।

*********************

फैली सम्‍प्रदायिकता के लिए,

देते सब इक दुजे को दोष ।

बदले की आग से,

हर दिल में भरा रोष ।।

*******************

आजाद–अश्‍फाक की जोड़ी टुटी,

नफरत की चिंगारी बिखरी ।

इस सभ्‍य समाज में,

कैसी यह अमानुषिकता उभरी ।।

—————————————–

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

udayraj के द्वारा
September 10, 2013

आज हम एक शिक्षित, सभ्य इंसान कहलाने वाले लोग न जाने क्यों दंगा पे उतर आते हैं । क्या‍ दंगा समस्याओं का समाधान है ???

bdsingh के द्वारा
September 13, 2013

आपने खून खराबे के परिणामों को बहुत गहराई के साथ  कहा है।मानव के सामने धार्मिक हठधर्मिता का कोई स्थान नहीं होता है।

bdsingh के द्वारा
September 13, 2013

मानवता

udayraj के द्वारा
September 14, 2013

बिल्कुल सही कहा आपने , मानव मानव में कोई अंतर नहीं होना चाहिए । इकबाल की ये पंक्तियां याद आती हैं- ‘मज़हब नहीं सीखाता आपस में बैर रखना’

udayraj के द्वारा
September 14, 2013

जी महोदय ।

yogi sarswat के द्वारा
September 14, 2013

जले, मिटे कितने ही इस, सम्‍प्रदायिकता की आग में । बुझ गए कितने ही कुलदीप, न रहा सिंदुर कितनों की मांग में ।। ********************* फैली सम्‍प्रदायिकता के लिए, देते सब इक दुजे को दोष । बदले की आग से, हर दिल में भरा रोष ।। *******************सटीक और व्यावहारिक शब्द

yogi sarswat के द्वारा
September 14, 2013

जले, मिटे कितने ही इस, सम्‍प्रदायिकता की आग में । बुझ गए कितने ही कुलदीप, न रहा सिंदुर कितनों की मांग में ।। ********************* फैली सम्‍प्रदायिकता के लिए, देते सब इक दुजे को दोष । बदले की आग से, हर दिल में भरा रोष ।। ******************* सटीक और व्यवहारिक शब्द

udayraj के द्वारा
September 14, 2013

महोदय आपने मेरे ब्लाग पर आकर जो मेरा हौसला बढाया है , उसके लिए बहुत – बहुत धन्ययवाद ।


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