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एकाकी जीवन (कविता – कॉन्टेस्ट)

Posted On: 24 Jan, 2014 कविता,Contest,Hindi Sahitya में

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एकाकी जीवन

जीवन की सुनहली ,
कपोल, कल्पित – कल्‍पनाएँ
दिवासान की छवि – सी
मधुर, पर क्षण भंगुर
जीवन-चक्र संघर्षो से
होती धुमिल ।।
——-

यादों के आइनों से उबर,
बंद पुंखडि़यों सी नई
कलि-खिली – मुस्‍काई
निर्मल-निश्‍चछल सा,
क्षण भर का भ्रमर-मिलन
वही फिर तंहा-जीवन ।।
——————–

एकाकी जीवन की व्‍यथा,
संघर्षों की यह कथा
अधुरे स्‍वपन का स्‍नेह – भरा प्‍यार
पुर्ण होने की पुन: इंतजार
जीवन के पतझड़ में , न जाने
कब आए बसंत बहार ।।
—————————

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
January 28, 2014

सुन्दर अभिव्यक्ति, सादर राज जी !

udayraj के द्वारा
January 28, 2014

जी महाशय बहुत – बहुत धन्यवाद


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