meri awaaz - meri kavita

कहीं दब न जाए मेरी आवाज ... खामोशी के बीच

25 Posts

100 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15395 postid : 696722

आम आदमी (कविता - कॉन्टेस्ट)

Posted On: 30 Jan, 2014 कविता,Contest,Hindi Sahitya में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

आम आदमी

आम सा असानी से मिलेने,
और निचोड़ा जा सकने वाला
युगों युगों से शोषित,
अपनी अस्मिता की
तलाश में – गुठली सा
आम आदमी है ।।
***
और इसकी किमत भी,
उस आम की तरह है –
जो जिंदा में ३६ रूपये किलो,
और बोतल में –
एक आम का रस
३६ रूपये का है ।।
***
इसकी किस्‍मत भी,
कितनी अजीबो-गरीब है ।
स्‍वयं की किमत,
दूसरी मुट्ठियों में –
कैद है ,
जिसके पास बोतल है ।।
***
तमाम उम्र खुन-पसिने
एक करने पर भी –
वह कुछ कर
नहीं पाता है
तड़पता हुआ आधी उम्र में
मारा जाता है ।।
***
छोड़ जाता है एक
बेसुध, भूखा-‍परिवार,
जिसकी अपनी
जिंदगी से ही
३६ का आंकड़ा है
जिससे वह पार नही पाता है ।।
——————————
उदयराज़

(जागरण जंकश्न में २८ अगस्त २०१३ को प्रकाि‍ शत )

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

5 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
January 30, 2014

३६- ३६- ३६ क्या आंकड़ा इकठ्ठा किया आपने …यही तो है आम आदमी की कीमत और यह कीमत निर्धारित की है खास लोगों ने खास वातावरण में बैठकर!

udayraj के द्वारा
January 31, 2014

जी एल सिंह जी , बिल्कुल सही कह रहे है —- आज आम आदमी इस ३६ के आकड़े से पार नही पा रहा है

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 31, 2014

सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति ! उदय जी बधाई !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 31, 2014

सुन्दर सामयिक प्रस्तुति !बधाई उदय जी ! आदरणीय जबाहर जी से मैं भी सहमत हूँ !

udayraj के द्वारा
February 1, 2014

उत्साहवर्धन के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद गुंजन जी । आम आदमी के नाम लेकर ही सारे तंत्र है लेकिन आम आदमी आम सा ही रहता है और लोग खास हो जाते हैं । 1


topic of the week



latest from jagran