meri awaaz - meri kavita

कहीं दब न जाए मेरी आवाज ... खामोशी के बीच

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आदमी पलायन कर चूका है

Posted On 25 May, 2016 कविता में

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ये कहानी है या हकीकत
कुछ समझ में नही आता

ये झूठी है या सच्ची
कोई नहीं बता पाता

रहस्य सा लगता है
जो टूटता ही नही है

और टूटता है तो
हर टुकड़े में कहानी होती है

जिंदगी उलझ जाती है
सुलझाने में स्वयं को

शायद सच और झूठ अब मिल चुका है

आदमी से आदमी पलायन कर चूका है ।
*************************

उदयराज

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
May 26, 2016

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी …बेह्तरीन अभिव्यक्ति!शुभकामनायें. आपको बधाई आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.


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